प्रेम के दो मीठे बोल,
देते मन में अमृत घोल।
सौ रोगों की एक दवा है हँसना और हँसाना।
मीठी बोली से है सम्भव रूठे हुए को मनाना।।
मीठी बोली ऐसी जैसे पानी और चीनी का घोल,
प्रेम के दो मीठे बोल, देते मन में अमृत घोल ।
रास्ते कितने टेढ़े हो मुश्किल भी कितनी आयें।
डटकर करें सामना उनका नही तनिक भी घवरायें।।
दुख सुख का ये चक्रव्यूह है जैसे होता है वो गोल,
प्रेम के दो मीठे बोल,देते मन में अमृत घोल।
इक दूजे की दवा बनें हम इक दूजे का बने सहारा।
जैसे तूफानों से बचकर मांझी पा लेता नदियां का किनारा।।
कद्र करो इस जीवन की ये जीवन है अनमोल,
प्रेम के दो मीठे बोल,देते मन में अमृत घोल।
न कुछ लेके आये जगत में न कुछ लेके जायेगें।
प्रेम केमीठे शब्दों से हम खुद को अमर कर पायेगें।।
बेशकीमती ये तन भाई मत माटी में घोल,
प्रेम के दो मीठे बोल, देते मन में अमृत घोल।
सर्वाधिकार सुरक्षित
शीला द्विवेदी "अक्षरा"

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