⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘ॐ ⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
चारों दिशा अंधेरा छाया---
यह कैसा दौर आया,
खुली हवा में दम घुट रहा---
मुख पर भी नकाब लगाया,
कहां गई वह स्वच्छ हवा---
  हर चेहरा मुरझा रहा है, 
ना रुक जाए दिल की धड़कन---
फूंक फूंक  कदम उठा रहा है,
   पग पग पर कांटे बिछे हैं---
चुभ ना जाए  पग में कांटे,
  बच कर आगे बढ़ना भी है---
जीवन के मुश्किल डगर में
खुशियां हासिल करना भी है,
  जब   अंधकार छा जाता है---
और सब अदृश्य हो जाता  है,  
एक छोटे दीपक  की लौ से-- 
अंधकार मिट जाता है,
  हिम्मत सदा जिंदगी रहती है---
हासिल, जीत वही कर पाता है,
सकारात्मकता की सोच----
दिल में सदा जगाना  है,
नकारात्मक सोच को--- 
हर कदम पर धूल चटाना है,


संगीता वर्मा✍✍