जहाँ नित नए अवतार हुए हरि के,पुण्यश्लोक ये धरती है।
वेदों की अमर ऋचायें जहां इतिहास की चादर बुनती है।।

दान,धर्म, और प्रेम दया ने,अपने रूप दिखाए है।
भारत की महान विभूतियों ने इतिहास से पन्ने सजाए है।
गर्भ में शिशु को रख कर जब माँ हरि चर्चा सुनती है।
इतिहास रचाने वाला फिर प्रह्लाद सा बेटा  जनती है ।।
जहां नित नए अवतार हुए हरि के पुण्यश्लोक ये धरती है।
वेदों की अमर..........

रघु दिलीप से राजाओं ने याचकता को दूर किया।
लाये गंगा को पृथ्वी पर भागीरथ ने पितरो को मोक्ष दिया।
श्री रामवतार लेकर अभिमानी रावण का उद्धार किया।
हरिश्चन्द्र से दानी से जब धरती की गोदी सजती  है ।।
जहां नित नए अवतार हुए हरि के पुण्यश्लोक ये धरती है।
वेदों की अमर........... .

सीता ,तारा,द्रोपदी, कुन्ती राधा  मीरा  सी दीवानी है।
लक्ष्मी बाई है झाँसी की इतिहास में अमर कहानी है।
देती परिचय अपने सतीत्व का पद्मावती सी महारानी है।
कोई देता बलिदान है गर तो कोई त्याग की मूर्ति है।।
जहां नित नए अवतार हुए हरि के पुण्यश्लोक ये धरती है।
वेदों की अमर.............

संस्कृति और संस्कारों से जो पहिचान कराता है।
देता है शिक्षा धर्म नीति की ज्ञान का पाठ पढ़ाता है।
भारत माँ के वीर सपूतों का बलिदान सुनाता है
होते है अमर स्वर्णिम अक्षर में पावन कीर्ति होती है।।
जहां नित नए अबतार हुए हरि के पुण्यश्लोक ये धरती है।
वेदों की अमर ऋचाएं जहां इतिहास की चादर बुनती है।

(स्वरचित एवं मौलिक)
शीला द्विवेदी "अक्षरा"