तारीफें मैंने खुद की इतनी कर ली
खुद को ही नज़र लगा बैठी ।

घमंड - दंभ का बीज पनप न जाए
ईश्वर ने मेरी सीमा तय कर दी ।

दिमाग ना चढ़े सातवें आसमान पर
पैरों के नीचे से थोड़ी जमीन खींच ली ।

उसकी रज़ा में खुश रहना है
मैं तो इस काबिल भी ना थी ।

अभी तक गुमनामी के अंधेरों में थी
हुनर कुछ था नहीं, बेकद्री अपनी थी ।

ईश्वर ने यह दिन दिखाया
लेखन में हाथ आजमाया ।

देवा ज्योति खुशबू विजय
और कई प्रशंसक मिले ।

बड़ी सी इस दुनिया में
छोटी सी पहचान बन गई ।