फिर रौनक लौटेगी शहर में गली करेंगी गुंजारें।
बीत जाएगा इक दिन पतझड़ "फिर आएगी बहारें"।।

दादी और दादू के संग फिर पार्क में बच्चे खेलेंगें।
खुशियों की लहर फिर आएगी संकट के बादल जायेंगें।।

बंद हुए स्कूल खुलेंगे फिर से शुरू पढ़ाई होगी।
मंदिर और गुरुद्वारे में फिर गुंजायमान घण्टा ध्वनि होगी।।

थम जाएगा मौत का मंजर हम बेफिक्रे घूमेंगे।
कोबिड नियमों का कर पालन हम कोरोना से जीतेंगे।।

होगी शादी  बर्थडे  पार्टी  खूब के क हम कटेंगें।
पूर्ण स्वस्थ उल्लास के साथ फिर से खुशी मनाएंगे।।

खुश होकर खूब सजायेंगे हम घर आँगन और चौबारें।
बीत जाएगा इक दिन पतझड़ "फिर आएंगी बहारें"।।

शीला द्विवेदी"अक्षरा"
उत्तर प्रदेश