हम  बच्चों  के  जीने  की  आस  है   माँ .
इंसानी  हर  रिश्तों   में     ख़ास  है  माँ .

आज  फिर  याद  आये  हैं.... .. बाबूजी .
फिर     उनके    लिए   उदास   है    माँ . 

क ,  ख , ग , घ ,    तूने  हमें  सिखाया .
जीवन  का  हर     फलसफा  समझाया .

चलती ,,,, फिरती  ^^ सी   तू  पठशाला  .
ममता  के  रस  की.........तू  मधुशाला .

तू  मुझसे  दूर है.क्या? ये  सच  है   माँ .
महसूस  हुआ  तू  हरदम मेरे पास है माँ .



 @मेरी कलम मेरी जान..



                भूपेन्द्र चौहान "राज”