ए जिन्दगी तुझसे वादा है,
हर गम मे हमे मुस्कुराना है
कूछ खोया भी तो क्या हुआ
हर पल हमे गुनगुनाना है
खुद दुखी है तो क्या हुआ
दूसरो को भी तो हसाना है,हर पौधो में फूल खिलाना है
दुनिया पर दुखों का साया है तो क्या हुआ
सुखों की छाया भी तो लाना है
अभी पतझड़ है तो क्या हुआ
सावन भी तो लाना है
बिना सूरज निकले क्या
कभी कोई कल आया है
तो बस हर चांद के बाद
नया सूरज हमे ही लाना हैं

0 टिप्पणियाँ