सासु माँ भी होती है माँ,
करना उनका सम्मान,
पाला पोसा बच्चा अपना,
पल में होता क्या पराया,
अरमानों से करी शादी,
आते ही बहु ने अधिकार,
अपना जमा लिया क्यों..?
सासु माँ भी होती है माँ,
करना उनका सम्मान,
तुम्हें सोंपा अपना बेटा तो,
खो दिया मैंने बेटा क्या..?
पढ़ी लिखी आज की नारी,
कैसी हो गयी सोच तुम्हारी,
अपने खून से सींचा मैंने,
आते ही मुझ पर तोहमत,
सासु मांँ भी होती है माँ,
करना उनका सम्मान,
कैसी तुम हो शिक्षित नारी,
नारी का दर्द न समझ पायी,
एक बेटे को माँ से तुमने तो,
अलग करने की अब ठानी,
जैसे तुम्हारी अपनी है मांँ,
वैसे ही बेटे की भी अपनी माँ,
धारणा बदलती नहीं क्यों..?
सासु माँ भी होती है माँ,
करना उनका सम्मान ।
काव्य रचना-रजनी कटारे
जबलपुर ( म.प्र.)

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