ज़ुबां पर शहद
मगर दिल में जहर था ।
होठों पर प्यार
मगर आंखों में फरेब था ।
नफरत दिल में छुपाए
दिखावे का सुकून था ।
झूठ की नगरी में बसे सब
हाथों में उनके खंजर था ।
नकाब ओढ़े हुए उन चेहरों की
आंखों में सिर्फ धोखा था ।
अगर कोई मासूम आ जाए उस नगर
दामन को अपने बचाना मुश्किल था ।
जीने की वजह जो तलाश रहे
वहां उनका मर जाना तय था ।

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