मधुर - मधुर यह करतल ध्वनि ,
देखो करती है ये बातें घनी ।
5 से 15 मिनट हो गया ,
पूरा भारत एक हो गया ।
फिर भी गूंज रही ये अविरल धारा,
सुनकर दुश्मन हुआ किनारा ।
बच्चों को लगे सुहाना
बड़ों का न चला बहाना ।
दिन भर का सन्नाटा
शाम को भरे फर्राटा ।
सुनकर यह ध्वनि द्रवित हुए देवता भी ,
टूटे में भी हिम्मत भर दे
यह अदभुत ध्वनि ।
यह अद्बितीय ध्वनि ।।।
आज हम अपने ही घरों में कैद है ,
तभी तो हम मुस्तैद है !
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