स्नेहा BMW कार से उतर कर इतराती हुई कॉलेज के अंदर दाखिल हुई।सभी उसके शानो शौकत को  लोग देखते ही रह जाते,वह नख से शिख तक विदेशी ब्रांड से लदी रहती।

शार्दूल गांव से इंटर में बहुत अच्छे नंबर लाया था।पढ़ाई और खेल में बहुत अच्छा था।आगे की पढ़ाई के लिए पिता ने उसे शहर भेज दिया।
उसने घर किराए पर लिया,परन्तु आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उसने आस पड़ोस में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया।
उसे कॉलेज में सब चुटिया वाला कह मजाक उड़ाते थे,उसने  शिखा पर चुटिया रखी थी।

ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाला, शार्दूल  मितभाषी और अपनी संस्कारों का आदर करता था।
जब उसने साइंस में फर्स्ट ईयर में बहुत अच्छे अंक अर्जित किए।तब सभी उससे नोट्स लेने आगे पीछे दौड़ते थे।

स्नेहा भी उसी के क्लास में थी।उसे रूप और पैसे का घमंड था,वह सोचती जैसे सारे लड़के उसके आगे पीछे भ्रमर की तरह मंडराते रहते हैं,शार्दूल भी  मंडराए।

लेकिन शार्दूल को किसी से कोई लेना देना नहीं था,वह अपनी धुन में मगन था,उसे सिर्फ अपना कैरियर संवारना और अपने माता पिता के सपने को साकार करना था।जिसके लिए वो दिन रात एक किए था।

सेंट स्टीफेन कॉलेज का 50 वीं सालगिरह मनाई जा रही थी।इस बार कॉलेज में रशिया के वोस्टोक अंतरिक्षयान, के प्रथम यात्री युरी गागरिन  आए थे।

उनके स्वागत के  लिए सभी छात्रों को जिम्मेदारी दी गई थी।स्नेहा ने उन्हें फूल माला भेंट किया।
संजय उन्हें स्टेज तक ले आया।
शार्दूल के जिम्मे उनके देश के उन्नति और उनकी उपलब्धि के बारे में स्पीच देनी थी।

शार्दूल ने उनके बारे में अच्छी अच्छी बातें कहीं।
उसके बाद प्रिंसिपल ने आग्रह किया कि मुख्य अतिथि आकर विद्यार्थियों को विज्ञान के रुचि जागृत करें।

ऑडिटोरियम में एक दम सन्नाटा था। यूरी गागरिन आगे बढ़ माइक पकड़ते हैं,और अपने देश की उपलब्धियों का बखान शुरू करते हैं। हमारे देश रुस ने यांत्रिकी में विशेष उपलब्धि हासिल की है,हमारे देश के बराबर कोई नहीं।हमने विश्व को नई तकनीक दी है।
इसलिए विश्व को हमारे देश का ऋणी होना होगा ।

दर्प से उनका चेहरा चमक रहा था।
भाषण समाप्त होते ,शार्दूल ने धन्यवाद ज्ञापन हेतु माइक संभाला।

उसने कहना शुरू किया ,आदरणीय गागरिन महोदय,ये सच है कि आपके देश ने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है ,लेकिन हमारा भारत जगतगुरु है।
हम कला,यांत्रिकी ,संस्कार में सबसे आगे हैं।
जिस स्पेसक्राफ्ट पर चढ़कर  आप अंतरिक्ष गए।
हमारे ऋषि मुनियों ने उसका विज्ञान सदियों पहले अपनी पुस्तक में लिख छोड़ा है।जिस बिजली के बल्ब का आविष्कार  का श्रेय आप सब लोग थॉमस एडिशन को देते हैं, अगस्त्य मुनि ने उसकी तकनीक अगस्त्य संहिता में लिख रखा है।

और अंतरिक्ष यान की बात करें तो हमारे यहां पुष्पक विमान ,का निर्माण बहुत पहले अगस्त्य मुनि ने कर दिया था।

अगर आप लोगो को मेरी बात का विश्वाश ना हो तो आप भारद्वाज का विमान प्रकरण पढ़ सकते हैं।जिसमे उन्होंने आठ प्रकार के विमान के बारे में बताया था ,जो अन्तरिक्ष तक में जा सकता था।

शार्दूल ने कहा हमें बहुत दुख होता है ,जब लोग हमे कमतर आंकते हैं,विदेशी तो हमारी जड़ों से नहीं परिचित लेकिन हमारे देश के युवा भी विदेशी वस्तुओं की ओर भागते है और इसे वे स्टेटस का सिंबल समझते हैं।

स्नेहा बगले झांकने ने लगी ।आज बातो बातो मे शार्दूल ने सभी को आइना दिखा दिया था।
गागरिन महोदय ने हंस कर उसे गले से लगा लिया।

सारा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
जय हिन्द के नारे लगने लगे।
उसके बाद तो शार्दूल कॉलेज का हीरो बन गया, चुटिया वाला कह कर चिढ़ाने वाले ,उसके आगे पीछे घूमने लगे।

स्वरचित_संगीता