उधर से आवाज़ आयी.....जी उनका एक्सीडेंट हो गया
है ..  ........वो सिटी हॉस्पिटल में है..  ............ 
मैं जोर से चिल्लाई माँ......     .........**......  ???
औऱ दौड़ते हुए माँ के पास गई औऱ एक ही सांस
में सारी बात बता दी।
हम लोग घबरा गए ।फिर एक ऑटो से हम हॉस्पिटल पहुंचे।........................डॉक्टर ने कहा कि सर में चोट
आयी है,    हालत बहुत गंभीर है । कुछ कहा नहीं जा सकता ।। .......   ........           माँ।   यह सुन कर बेहोश
हो गई । किसी तरह मैं माँ को संभाली । कुछ देर बाद मानस की भाभी भी आ गयी।वो हमारी बहुत मदद की बहुत सांत्वना दी हमलोग को वो बोली  मानस को बुला लेते हैं मैं बोली नहीं फिर तो वो एक हफ्ते में आ ही जायेंगे।...............भाभी बोली ठीक है।  
             2 दिन बाद पापा की हालत में थोड़ा सुधार आया तो वो हमलोग से थोड़ा बात किये पापा ने इशारे से मुझे अपने पास बुलाये और बोले...............
                          अंजली बेटा मैं .....बोली जी...... पापा बोले
मैं चाहता हूँ  तुम बैंक की नोकरी करो............मैं बोली..हाँ पापा मैं जरुर करूँगी।आप जल्दी से ठीक हो जाइये।
मेरे इतना कहते ही पापा की आंखों से आँसू की धारा ........निकल गई मैं भी अपने आप को रोक नहीं पाई।
......फिर उन्होंने माँ से कहा बच्चों का ख्याल रखना...
...आर्यन  के  सिर पर हाथ रख के बोले बेटा बड़ा होकर
अच्छा आदमी बनना.................. सदा 
के लिए अपनी आँखें मूंद लिये.............. 
                      हमारे परिवार पर तो दुखों का पहाड़ टूट
पड़ा। इस दुख की घड़ी में मानस के भैया -भाभी हमारी बहुत मदद किये।
.........दूसरे दिन पापा की अंतिम क्रिया भी हो गई।
माँ अब एक पल भी इस शहर में नहीं रहना चाहती थी।
मानस की भाभी ज्यादा समय हमारे साथ ही बिताती
थी।।                  3  दिन हो गये माँ के आँसू बंद
नहीं हो रहे थे ।माँ के सामने मैं हिम्मत दिखा रही थी
पर अंदर से मैं बिल्कुल टूट गयी थी।
................. सुबह में मानस की भाभी हमारे लिए खाना
ले के आयी और बोली " अंजली " चलो आंटी जी को खाना..... . 
खिला देते हैं ......मैं बोली आप ही कोशिश करये माँ
कुछ खाती ही नहीं। भाभी माँ के कमरे में गयी बहुत
कहने और समझाने के बाद माँ थोड़ा सा खायी ।
फिर भाभी बाहर आई तो मैं भाभी को धन्यवाद 
बोली...............अरे धन्यवाद क्यों हम तो परिवार
के जैसे हैं.....उनकी शब्दों में बहुत अपनापन था।
फिर मैं बोली हम लोग अपने होम टाउन ग्वालियर जाना 
चाहते हैं।माँ अब यहां बिल्कुल नहीं रहना चाहती.......
..........भाभी उदासी भरी नज़रों से मुझे देख ने लगी....
और बोली मानस को आ जाने दो फिर चले जाना तुमलोग..............
                  फिर मैं बोली नहीं माँ की मनोदशा ठीक नहीं है .....हम चले जाते हैं वहाँ रिश्तेदार भी हैं हमारे उन सबके बीच माँ रहेगी तो अच्छा रहेगा ।
........भाभी बोली ठीक जैसा अच्छा लगे तुमलोग को....
क्रमशः*******
                ऋचा कर्ण