पैंसठ वर्षीय रावत जी उदास मन से पार्क में टहल रहे थे ।
शाह जी ने हाथ हिलाकर उन्हें अपने पास बुला लिया ।
शाह जी बोले, "रावत क्या बात है ? आज कुछ उदास लग रहे हो । सब ठीक तो है ना ?"
रावत जी बेंच पर बैठ गए । कोई जवाब ना पाकर शाह जी बोले, "यदि बता सकने वाली कोई बात है तो मुझे कह कर अपना दिल हल्का कर लो । बोझ मत रखो । हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूं ।"
रावत जी बोले, "क्या बताऊं ? अभी साल भर पहले ही बेटे ने लव मैरिज की और अब दोनों अलग होना चाहते हैं । इनके लिए रिश्तों का कोई मतलब ही नहीं रह गया ।"
शाह जी बोले, "अब जमाना बदल गया है । याद है, अपने समय में शादी से पहले लड़के - लड़की एक - दूसरे के लिए अनजान रहते थे और शादी के बाद भी भरे - पूरे घर में एक दूसरे से बात तक करने को तरसते थे इसलिए जब भी मिलना होता था, वह बड़ा ही सुखद लगता था और अगले मिलन का फिर से इंतजार रहता था । एक - दूसरे की कमियां और खूबियां पता चलते - चलते बरसों निकल जाते थे ।"
रावत जी बोले, "हमने तब ही मना किया था पर बच्चों की खुशी के लिए हां कर दी । दोनों साथ ही नौकरी करते हैं और वहीं रहते भी थे । अब जाने क्या हुआ ?"
"सही कह रहे हैं आप रावत जी, बच्चों को मना तो कर ही नहीं सकते । वे हमें रूढ़ीवादी, दकियानूसी सोच का बताते हैं या फिर घर से भाग जाते हैं या खुदकुशी कर लेते हैं ।"
शाह जी आगे बोले, "कोई भी रिश्ता हो उसे निभाने के लिए रिश्तों में स्पेस होना जरूरी है । मेरा मतलब यह नहीं कि हमारा जमाना ठीक था या आज का समय गलत है । मैं तुम्हें अपने बारे में बताता हूं । अभी तक मैं सुबह से शाम तक ऑफिस में रहता था । घर में कम समय दे पाता था । सब ठीक चल रहा था । रिटायर होने पर रात - दिन घर में रहने लगा । अब मुझे घर की हर बात गलत लगने लगी । मैं सब को रोकने - टोकने लगा और कुछ ही दिन में मुझे सब कुछ बुरा लगने लगा । फिर मैं रोज कई - कई घंटों के लिए बाहर रहने लगा । पार्क में समय बिताने लगा । तो भी घर में ज्यादा कुछ ठीक नहीं हुआ क्योंकि रिटायर तो सिर्फ में हुआ था, मेरी बीवी सुषमा नहीं । वह तो अभी भी हर वक्त काम ही करती रहती थी । फिर मैंने एक दूसरा रास्ता निकाला । मैं छोटे-छोटे काम में सुषमा की मदद करने लगा । जिससे उसका काम भी जल्दी हो जाता और मेरा टाइम पास भी होता । अब सुषमा भी मेरे साथ बाहर घूमने निकल पाती
थी । इस तरह अब मैं थोड़ा - बहुत बाहर रहता हूं तो सुषमा को बुरा भी नहीं लगता ।"
रावत जी बोले, "आप ठीक कह रहे हैं शाह जी, जीवन में कई तरह के मोड़ आते हैं । कई समस्याओं का हल वक्त के पास होता है और कई समस्याएं हम अपनी सूझबूझ से हल कर लेते हैं । यही हमारे जीवन और रिश्तों की संजीवनी है कि समय के अनुसार बढ़ते चलो ।"

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