पता तुम्हारा हम ,अब ना
लगा पा रहे,
हृदय को  बस झूठी
दिलाशा दे कर समझा रहे,
तुम क्यों नजरों से
ओझल हो,
हम तो तुम्हें अब भी बंद
निगाहों में पा रहे,
बोलने से टूट जाते ,
यदि रिश्तें
तो हम तुम्हें ना लिख पाते,
ना तुम नैनों में आते
और ना कमल खिलखिलाते,
दीदार की आश तो अब भी
तुम्हारा है,
फर्क सिर्फ इतना है नजरों में नहीं
अब दिल में तस्वीर तुम्हारा है,
पहुंचें यदि शब्द तुम तक 
तो थोड़ा मुस्कुरा देना,
निगाहों से दुर रहना चाहो तो
रह लेना, पर दिल से थोड़ा अपना लेना।।

प्रिया❤️✍️