होती जो हर किसी के पास
अपनी किस्मत की किताब,
बदल लेते हालातों को अपने सब
सोचिये फिर क्या होता जनाब...?
मेहनत जैसा कोई शब्द न होता,
लगन का पौधा कोई न बोता,
निश्चिंत हो हर आदमी सोता,
किसी का भविष्य न होता खराब
बदल लेते हालातों को अपने सब
सोचिये फिर क्या होता जनाब...?
चिन्ता किसी बात की होती नहीं,
ख्याति में कमी किसी की होती नहीं,
नौकरी की जरूरत कभी होती नहीं,
मनमाफिक पाते सूकून की छाँव
बदल लेते हालातों को अपने सब
सोचिये फिर क्या होता जनाब...?
जो चाहते, वो पा लेते,
तरक्की को मोहताज बना लेते,
मुट्ठी में जहाँ सारा समां लेते,
आसमाँ पर होते फिर अपने पाँव
बदल लेते हालातों को अपने सब
सोचिये फिर क्या होता जनाब...?
सोचिये जरा, क्या ये सही होता?
विचारिये, कर्मों का क्या बजूद रहता?
ध्यान दीजिये,कुछ भी शाश्वत नहीं रहता
समझिये,बिन मेहनत है सब हराम
कैसे बदल लेते हालातों को अपने?
अजीब ही होता हाल जनाब...।
यकीं खुद पर हो,तो किस्मत बनती है
किताबें सही पढ़ो,सफलता जरूर मिलती है
नींव लगन व धैर्य की कभी नहीं हिलती है
बस कठीन परिश्रम का बनाओ स्वभाव
बदल जायेंगें हालात एक दिन स्वतः
ऐसा ही होता है विश्वास का बहाब...।
स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा

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