सो चुका है जग सारा
मेरी अंखियां तुम्हारे अंखियन
मैं समाई है
आंसू झलक रहे हैं क्यों
तो चैन मुझे भी ना आई है
बरस रही है यहां घनघोर घटाएं
नाम पुकार रही तुम्हारी
पुरवाई है
बजा दो ना कोई गीत मधुर
सुनने को हृदय ललाइत है
सो चुका है जग सारा पर
मेरे आंखों में तुमने अभी
प्रेम ज्योत जलाई है
सहेज लूं मैं तुम्हें अपने
मन में ,इससे ज्यादा का हक
तुमसे नहीं मिल पाई है
सो चुका है ‌जग सारा और
हमने अब भी प्रीत तुमसे ही लगाई है।



प्रिया  ❤️✍️