आनंदित भेलहूँ विभोर यैऊ,
स्वाद चरम,बनल मुदा झोर यैऊ...
सेकल ताबा कै 'गोल-गोल',
फूईल 'क' 'रोटी' बनल बेजोर यैऊ...


साथे बनल ढ़ेरो पकवान,
घी-मलिद्दा कै रोट...
ठन-ठन बाजैत अछि लावा,
ठाठ बान्हल मकई यैऊ...


मरुआ रोटी में मास लागल मुदा,
झरकैत धूपक बोझ परल अछि...
नाइप-जोखी 'क' पोन-पसेरी,
स्वाद मुदा अछि गेहूँ कै रोटी में...



         लेखक:-विकास कुमार लाभ
                        मधुबनी(बिहार)