चाय दिवस पर आपकी, दीजे हमको राह।
चाय बनी है आज की, सबसे पहली चाह।।
चाय चलाती घर कई, होटल दे आनंद।
बाजारों में हो गई, चाय आजकल बंद।।
सुबह सुबह सबके हृदय, जो जाती है भाय।
चाह लगे जिसकी बहुत, वह कहलाती चाय।।
चाय बना कर दीजिए, खुश होते मेंहमान।
चाय पिला कर आपका, बढ़ जाता है मान।।
चाय पिलाने से बनें, सारे बिगड़े काम।
रिश्वत ने भी ले लिया, चाय पान का नाम।।
अपने भारत देश में, बना सफलता मंत्र।
चाय हृदय से चाहता, ये सरकारी तंत्र।।
काम बनाओ आप अब, श्वेता की है राय।
अधिकारी को दीजिए, अब मन माफिक चाय।।
श्वेता कर्ण

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