तेरा पनघट आना आज हमको याद आता है!
तेरा मुड़ मुड़ के हमको देखना वो याद आता है!!
मिले थे बाग में जब हम बिताए साथ जो लम्हे!
तेरी जुल्फों के साये में सुने थे प्यार के नग्मे!!
तुम्हारे साथ जो गुजरा ज़माना याद आता है!
तेरा पनघट पे आना आज हमको याद आता है!!
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तेरी राहों में आखें बिछाकर हम राह तकते थे!
तुम्हारी झील सी आँखों जब हम डूब जाते थे!!
तुम्हारा यूं रूठकर हमको मानना याद आता है!
तेरा पनघट पे आना आज हमको याद आता है!!
तेरे खतों को हमने रखा है अभी तक संभालकर!
तेरी तस्वीर को रखते हैं हम सीने से लगाकर!!
ख्वाबों में तेरा चांँद सा चेहरा हमें नजर आता है!
तेरा पनघट पे आना आज हमको याद आता है!!
हनुमान कुमार

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