जल्दी- जल्दी सारा काम कर कितना समय लगती है,खाना भी तो बनाना है करती हू नई माँ।
रूही 10साल की है ,पर उसकी माँ नही है,बीमारी ने जान ले ली ,9साल की रुही को उसकी माँ छोड़ के चली गई ।उसके पापा उसे पाल रहे थे ,पर सब लोग कहने लगे कि दूसरी शादी कर लो रुही को एक माँ मिल जाएगी ।
एक साल बाद रूही के पापा ने कर ली शादी ,पर उसे माँ नही मिली एक मालकिन मिल गई जो हर समय उसे काम देती ।
दस साल की रुही भी क्या करे रो रो के काम करती और अपनी माँ को याद करती।
रूही के पास उसकी माँ के एक जोड़ी कंगन है ,वो अपनी माँ के कंगन से बहुत सारी बातें करती थी ,ये कंगन उसकी माँ ने बहुत ही अरमान से बनवाया था मानो की उस कंगन मे उसकी माँ की रूह बसी हो उसे जब सोना होता या फिर अच्छे कपड़े पहना ,अच्छा पकवान खाना होता तो रुही उस कंगन को पहन लेती और उसे नींद आजाती वो सपनो की दुनिया में जा कर खूब अच्छे अच्छे खाना खाती ,खेलती है और सुन्दर कपड़े भी पहनती है।जब वह जगती है तो उसका पेट भरा रहता है,जो कपड़े उसने सपने मे पहना होता वही कपड़े वो हकिकत मे भी पहनी रहतीं है ।पर वो नई माँ की वज़ह से खोल देती है ।
.........एक दिन रुही कंगन से बात कर होती हैं तभी उसकी नई माँ आजाती है और वो देख लेती हैं उसके मन में लालच आ जाता हैं और वो पुछती है ये कंगन तुम कहा से लाई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,य######ये मेरी माँ के है उसने मुझें दिया था और कहा था की ये मै अपने से कभी दुर ना करू । वो कंगन इतने सुन्दर थे ,और देखने मे भारी भी लग रहे थे ,ठीक है, ठीक है जा जाके काम कर ये नही करेगा तेरा काम ।
रुही को डाट पड़ी तो दुख उस कंगन को हुआ उसकी तो चमक ही फीकी पड़ गई ।रूही कमरे से गई,उसकी नई माँ ने वो कंगन चुरा लिये वो जैसे ही अपने हाथो मे पहने लगी उसके साईज ही एक दम छोटा हो गया वो देख के हैरान हो गई,उसने रूही को बुलाया और कहा कि तूने इसपे जादू किया है ,न .......नही तो फिर ये इतने छोटे कैसे हो गये मुझे नही पता झूठ बोलती हैं, मै झूठ नहीं बोल रही ।
उसकी नई माँ ने वो कंगन रख लिये ,भूल जा ये मेरे है ।
रुही ,रूही जल्दी आओ मै जा रहा हू,क्या चाहिए तुम्हे ,कुछ नहीं बस आप जल्दी से आजाना ह बेटा मै दो दिन में अपनी मीटिंग खत्म कर के आजाऊगा ।तुम उदास मत हुआ करो नई माँ है ना ।
जी पापा । ठीक है मेरा बच्चा चलो बाय, वो अपने पापा को जाता हुआ देखती रही ,अब तो
उसके पास उसकी माँ के कंगन भी नहीं हैं वो एक दम अकेली है
।चलो अपने काम पर लग जा सारे बर्तन धो ले ,वो बेचारी गई किचिन मे।
अमन जो रुही के पापा का नाम है
उसने अपना मोबाइल लेने के लिये पीछे सिट पर देखा तो उसे नही मिला उसने गाड़ी मे पूरा चेक किया तो भी नही मिला उसे याद आया की वो तो घर मे ही भूल गया ,तभी उसे कुछ गिरने की आवाज आती हैं वो उठा के
देखता है तो उसे याद आता हैं अरे ये तो प्रिया के कंगन है पर
यहा कैसे वो कंगन को लेके बड़े ध्यान से देखता है तो उसे सब
दिख जाता ही की उसकी बेटी पे कैसे हुकुम चला रही हैं उसकी दूसरी माँ अमन को बहुत ही गुस्सा आता है वो फटा फट घर
पहुचता है और दरवाजे पे ही खड़ा हो कर सब देखता है ।और घर के अन्दर जा के सबसे पहले वो अपनी बेटी को किचिन मे से लाता है और बोलता है की तुमने मुझें बताया क्यों नहीं ये तुम्हारे साथ इतना गन्दा बर्ताव करती है ।मै तुम्हारे लिये नई माँ ले के आया की वो तुम्हारा ख्याल रखेगी पर ये तो मेरी बेटी के साथ ऐसा ...... छी उसकी पत्नी की सीटी पीटी गुम अब तो उसका सब खेल खत्म हो गया ।अमन उसे एक जोरदार तमाचा लगता हैं ,चली जाओ मेरे घर से मै तुम्हे तलाक के पेपर दे दूंगा,वो जल्दी से अमन के कदमो मे गिर जाती है और उससे और रुही से माफी मांगने लगती है आप दोनो माफ कर दो मै आगे से ऐसा नही करूगी ,रुही को अपनी बेटी की तरह प्यार दूगी और कंगन भी ला के देती है पर एक कहा गई मुझे नही पता ।तब अमन ने एक कंगन दिया ये लो कभी,अपने से दुर मत करना इसमे तुम्हारी माँ की रूह बसी है। रुही वो दोनो कंगन पा के बहुत ही खुश होती है।
पापा नई माँ को माफ़ कर दो पिल्ज पापा ,अमन बोलता है रुही बोल रही है इसलिए माफ़ करता हू पर ये आखिरी बार है दुबारा ऐसा नही होना चाहिए
नहीं होगा मुझे अपनी गलती का पछतावा है ।
रुही को गले लगा के बोलती है लव यू बेटा अब से तू मुझे सिर्फ़ मम्मी बोलेगी ठीक है ।
अब रुही को माँ का प्यार मिलने लगा और वो जादुई कंगन तो थे ही माँ का प्यार देने के लिये।

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