परदेस गए जब से तुम साजन
नीर बहे इन आंखों से ।
सिसक सिसक के मैं रोऊं
सिसकी ना रुक अब मेरी ।
जित देखूं तो तू ही तू दिखे
तेरी छवि नैनों से ना बिसरे ।
उन बातों की यादों में
बस सिसक सिसक के मै रोऊं।
सिसकी नहीं रुकती अब मेरी
तेरी हर अदा है याद मुझे
तेरी प्यारी सी छेड़छाड़ ।
वह प्रथम मिलन की प्रथम बात
सब बातों की है याद मुझे ।
प्यार भरी मीठी बातें
दिल पर गहरा आघात करें ।
बस नैनों से नीर बहे मेरे
सिसक सिसक के मै रोऊं
सिसकी नहीं रुकती है मेरी ।
सावन जब आता है
मेघा रिमझिम झड़ी लगाता हैं ।
दिल मेरा घबराता है
पिया मिलन की इस बेला में ।
सिसकी नहीं रूक पाती मेरी ।
प्रियतम याद तेरी मुझे
हरक्षण बहुत रुलाती है
सिसक सिसक के मैं रोऊं
सिसकी नहीं रूक पाती है।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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