ठुड्डी मेरी पकड़ते हुए
मां का मेरे बालों में कंघी करना,
तब देख उनकी आंखों की चमक
खुद को संवरा जान लेता था ।

पापा का अपने शेविंग करते हुए
मेरी नाक पर साबुन लगाना,
फिर मेरा भी उनकी नकल करना
कितना अच्छा लगता था ।

अपने छोटे-छोटे पैरों में
पापा की बड़ी-बड़ी चप्पल पहन,
पूरे घर में घूमते हुए
खुद को राजा समझता था ।

मां की चुन्नी-साड़ी से
अपने लिए घर बनाते हुए,
पूरा घर अस्त-व्यस्त कर
कितना खुश मैं हो जाता था ।

वक्त के साथ सब भुला दिया
मां का आंचल, पिता का साया
आज देखा अपने बेटे को तो
अतीत, आईना बन सामने आ गया ।