कोरोनकाल के इस भयावह परिस्थितियों ने हमें सोचने पर विवश कर दिया हैं कि हम क्या करे जिस से हम पूर्ण स्वस्थ रहे।
इम्यूनिटी, स्टैमिना, रोग प्रतिरोधक क्षमता
आजकल इनके बड़े चर्चे हैं हर कोई अभी अपनी इम्युनिटी बढ़ाने में लगा है। गांव हो नगर हो या हो महानगर , हर तरफ एक ही शोर हैं इम्युनिटी बढ़ाओ। पर कैसे बढ़ाएं ये शायद हमें सही से नहीं पता , कुछ लोग मंहगा खाना मतलब अच्छा खाना समझते हैं अब सबके मन मे आ रहा होगा महंगा खाना मतलब क्या , तो जरा रुकिए मैं इस महंगे खाने को परिभाषित किये देती हूं। जो सेब, संतरा,चीकू,अन्नानास अनार, जैसे और कई महंगे फल , काजू बादाम पिस्ता खजुर छुहारा, किसमिस, जैसे और कई सूखे मेवे।
ये सब हैं महंगे फल या आप कह सकते हैं पैसे वाले अमीरो के फल।
तो चलिए आपको लेके चलती हूं अब सस्ते फलों की ओर, अमरूद, आम, इमली, तेंदू चार, जामुन, कटहल, छिन, आँवला, और भी बहुत से देसी फल होते हैं अपने अपने क्षेत्र के अनुरूप। तो भइया ये हैं हमारे सस्ते फल गांव के फल गरीबों के फल अब हम अपने मूल कारक पर आते हैं ।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाएं । जिसको जिस जगह पर जो मिल रहा हैं उसी का सेवन आप प्रसन्न मन से करें , जी हां प्रसन्न मन से।
अब आप फिर से सोच रहे होंगे कि प्रसन्न मन ऐसा क्यों? क्यों खाते तो हम सब मुँह से है तो इसमें मन का क्या काम? तो भइया जरा ठहरिए और ध्यान से पढ़िये मन से और वो भी प्रसन्न मन से खाने को क्यों कहा जा रहा हैं । चलिए इसे ऐसे समझते हैं नगरों और महानगरों में समृद्धि और संपन्नता अधिक होती हैं गांवो की तुलना में फिर भी गांव का व्यक्ति अधिक सुखी और दीर्घायु हैं वो केवल दालभात (चांवल) सब्जी खाकर ही हमसे ज्यादा ताकतवर हैं हमसे ज्यादा मेहनतकश हैं और हम शहरी लोग भिन्न भिन्न पकवान भिन्न भिन्न फल फूल और मेवे खाकर भी विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हैं। किसी को शुगर तो किसी को ब्लड प्रेशर , थाइरोइड, हृदय रोग और भी कई जानलेवा बीमारियों के मालिक बन बैठे हैं हम शहरी लोग
इसिलए मैंने पहले ही चेता दिया था कि महँगा का मतलब अच्छा ही होना कदापि नहीं हो सकता। इसलिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह बात हैं कि हम महंगे के साथ देशी चीजों का सेवन भी करें मन को सदा प्रसन्न रखें और भोजन सदैव प्रसन्नचित्त मुद्रा में परिवार के साथ बैठ कर करें तभी हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को सही मायनों में बढ़ा सकते हैं।
साथ ही साथ हमे ऐलुमिनियम के बर्तनों का प्रयोग नही करना चाहिए पीतल और कांसे के बर्तनों का प्रयोग होना चाहिए जिसमें भोजन बनने के बाद वह सिर्फ भोजन नही बल्कि अमृत बन जाता हैं। कच्चे घानी का तेल, छिलके के साथ दालों का प्रयोग, लोहे के कड़ाई का उपयोग हमें अपनी दिनचर्या में लाने ही होंगे तभी हम सही मायनों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं और एक अच्छी जिंदगी जी सकते हैं जिसमे खुशियां होगी दवाइयां और इजेक्शन नहीं। तो भइया अब ध्यान रहे सबको महंगा मतलब अच्छा होना नहीं होता।
समझ गए न 😊
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थ्रीमा विनोद साहू

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