बहुत संघर्षी,फिर भी जीवन है प्यारा,
बेहतर से बेहतरीन हमेशा लक्ष्य हमारा,
लगे रहते पाने को दिखावा निरन्तर
कौन बूझे असली-नकली जग सारा...?
बता दिया बस कुछ करना है,
धकेल दिया, अब खुद जीना है,
खड़े होकर बस स्वयं साबित होना है,
लड़ो,गिरो और सम्हलो दोबारा
फिर लगे रहते पाने को दिखावा निरन्तर
कौन बूझे असली-नकली जग सारा...?
भर दिया,बस सफल होना है,
असफल के लिये न कोई कोना है,
भविष्य के लिये वर्तमान खोना है,
दौड़ गया फिर भीड़ में अंकुर बेचारा
फिर लगे रहते पाने को दिखावा निरन्तर
कौन बूझे असली-नकली जग सारा...?
खाओ ठोकरें और मजबूत बनो,
सहो दिक्कतें पर कामयाब बनो,
इच्छायें कुचलो,दूसरों के पीछे चलो,
जाने किसने ये सब मस्तिष्क में उतारा?
फिर लगे रहते पाने को दिखावा निरन्तर
कौन बूझे असली-नकली जग सारा...?
जिसको खेलना था अभी,उसे सपने दिखा दिये,
जिसे मिट्ठी में लोटना था,उसे आसमाँ बता दिये,
जिसे खुद सीखना था,उसे मोहताज बना दिये,
बनाकर नकलची,जाने कैसा भविष्य संवारा?
फिर लगे रहते पाने को दिखावा निरन्तर
कौन बूझे असली-नकली जग सारा...?
स्वरचित व मौलिक✍
सुमित सिंह पवार "पवार"
उत्तर प्रदेश पुलिस
आगरा

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