मुश्किल में यह तन मिला, करो प्रेम व्यवहार।
मानव जीवन के लिए, मानवता आधार।।
जीवन में भूल कर, भूल न जाना बात।
चार दिनों की चांदनी, फिर अंधियारी रात।।
मानव जीवन में मिला, हमको इतना ज्ञान।
मानवता छोड़ो नहीं, बने रहो इंसान।।
जीवन में हमको मिलें, बेशक लाखों कष्ट।
किंतु कभी आदर्श तुम, मत कर देना नष्ट।।
सुख का जब आरंभ हो, तब दुख का हो अंत।
हमसे कह गए, अपने साधू संत।।
श्वेता कर्ण

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