नीलकमल
राजकुमारी युग रत्ना विवाह योग्य हो चुकी थी ,पिता महाराज ने स्वयंवर की शर्त रखी थी कि ,जो राजकुमारी के लिए कुबेर के उद्यान से सुगंधित नीलकमल ले आएगा ,उससे ही वे राजकुमारी का विवाह संपन्न होगा।
कुबेर के उद्यान से नीलकमल लाना असंभव था।उसकी रखवाली यक्ष करते थे। सभी देशों के राजकुमारों ने अपनी अपनी सेना लेकर कुबेर की राजधानी अलकापुरी की ओर प्रस्थान किया।
अपनी ओर सेना को बढ़ते देख यक्षों ने अपनी मायावी शक्तियों से उन्हें दूर धकेल दिया।जो आगे किसी तरह बढ़े,उन्हें उन्होंने पर्वतों से नीचे फेंक दिया।
परन्तु राजकुमार दीपेंद्र बढ़ता जा रहा था,वह शिव का महान भक्त था।उसे अलौकिक शक्तियां प्रदान थी वह सभी विपतियों को पार करता ,सरोवर के सामने पहुंचा।
सरोवर तक पहुंचते शाम हो गई थी।वह चुपचाप से भौरें का रूप धारण कर कमल के पास मंडराने लगा ,और जैसे ही कमल की पंखुड़ियां बंद हुई ,उसने उसमें खुद को कैद कर लिया।उसे पता था कि रात में यक्षों की शक्तियां बढ़ जायेंगी।
भोर हुई ,🌞और सूर्य की पहली किरण प्रस्फुटित होने के साथ ही कमल पंखड़ी दल खुल गए, राजकुमार दीपेंद्र अपने रूप में आ निकले और सरोवर से जल्दी जल्दी तीन ,चार पुष्प तोड़े और अपने कमर में सावधानी से खोंस लिया।
और फिर पवन के वेग से अपने घोड़े पर सवार हो वापस लौटने लगे।
रास्ते में एक दीन वृद्ध उसे मिला,उसने राजकुमार को कहा _ मुझे प्यास लगी है,पानी पिला दो।
राजकुमार ने उसे अपने मशक से पानी पिलाया,जाने को तैयार हुआ तो !!ये क्या? नीलकमल गायब हो गए,और वह बूढ़ा नदारद था,उसकी जगह कुबेर मुस्कुरा रहे थे।
उन्होंने कहा ,"तुमने क्या सोचा मैं तुम्हे यूं ही ये दुर्लभ कमल ले जाने दूंगा।"मेरी ये शर्त है "_ अगर तुम मुझसे पहले राजकुमारी के स्वयंवर में पहुंच जाओगे तो मैं यह नीलकमल तुम्हे दे दूंगा।"
राजकुमार बहुत दुखी हुआ,लक्ष्य तक पहुंचने के बाद भी लक्ष्य कोसों दूर,फिर भी उसने शर्त स्वीकार किया।
राजकुमार दीपेंद्र घोड़े पर सवार हो ,जितना तेज़ हो सकता था हवा से बाते करने लगा।
उसने देखा ,कुबेर अपने पुष्पक विमान से उसके आगे निकल चुके।
उसने मन ही मन अपने आराध्य शिव को याद किया ।और अपनी पूरी शक्ति लगा दी।
आगे बढ़ने में।अब वह कोसलपुरी के करीब ही था,एक बार पीछे मुड़ कर देखा तो कुबेर कहीं नहीं थे।
कौशलपुरी पहुंचते उसका स्वागत हुआ,लेकिन वह हैरान था ,चारो ओर निगाहें घुमाई ,कहीं भी कुबेर नजर नहीं आए।
थोड़ी देर बाद कुबेर का पुष्पक विमान उतरा ,।
कुबेर ने लज़्जा से सर झुका राजकुमार दीपेंद्र को नीलकमल अर्पित किया,और कहा तुम जीते मै हार गया।मुझे अपनी शक्ति का बहुत गुमान था ।
राजकुमार अवाक था,उसने कहा कि आप तो मेरे आगे चल रहे थे ,,तो अचानक पीछे कैसे रह गए??
कुबेर ने कहा , मै धन ऐश्वर्य का स्वामी ,मुझे धन से बहुत प्यार है,रास्ते में मुझे सोने का महल दिखा और मै माया से वशीभूत हो अंदर चला गया।
वहां अत्यंत दुर्लभ मणि माणिक्य यत्र तत्र बिखरे थे, मैं वहां 😂उल्लासित हो बैठ गया और....पता नहीं कब नींद आ गई ,जब जागा तो कोई महल नहीं था,और बहुत देर हो गई ।
मैं शर्त हार चुका,तुम ईश्वर के बहुत बड़े भक्त हो ,तुम्हारे साथ स्वयं ईश्वर है,तुम्हारा कल्याण हो।
इतना कह कुबेर वहां से गायब हो गए।
राजकुमार ने वे दुर्लभ नीलकमल राजकुमारी को भेंट किए ।राजकुमार ,राजकुमारी का विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ🤵🤴।
स्वरचित_संगीता सिंह

0 टिप्पणियाँ