आपके प्रेम घृत के कारण ही
प्रियवर आज मैं रौशन हूं।
आप‌ ही तो सर्वस्व हैं मेरे
मैं आपका अवलम्बन हूं।।
      मैं केवल एक अनछुई सी कली थी
       आपके साथ ने प्रसून बनाया मुझको।
     अनगढ़,बेढब एक शिला से,आपके कारण
       सुगढ,सुगम बनना आया मुझको।।
जीवनसाथी,साथ तुम्हारा
मेरे जीवन के साथ ही बना रहे।
मेरे हृदय के अंतिम स्पंदन तक
सिंदूर मेरे मांग में सजा रहे।।