मैं कोई कवियित्री नही ......
बस एक गृहणी हूँ ......
दुःख दर्द की हरणी हूँ .......
सौकिया तौर पर लिखती हूँ ......
चूल्हा , चौका ,बर्तन , कपड़ें ......
घर - संसार बच्चे - बूढ़े ........
समय कहाँ  मिलता  हैं .......
मन में भावो की ....…...
कलियां तो बहुत हैं .......
पर कागज की बगिया में ......
कोई एक आध ही........
 फूल खिलता हैं .......
       ..........@ नेहा धामा " विजेता "