पिछले भाग में आपने पढ़ा कि नीलिमा के सामने रूहानी सचिन को बहुत बेरहमी से मार देती है और ये सब देख कर नीलिमा बेहोश हो जाती है!अब आगे-
नीलिमा को होश आता है,वो देखती है कि वो हॉस्पिटल में है और उसके मम्मीपापा उसके पास ही खड़े हैं!वो अपनी माँ से सचिन के बारे में पूछती है तो वो कहती है कि बेटा सचिन अब इस दुनिया में नही है!वो बुरी तरह रोने लगती है कि तभी उसे रूहानी का भयानक चेहरा याद आता है!वो चिल्लाने लगती है!माँ देखो सामने रूहानी खड़ी है!वो मुझे नही छोड़ेगी!नीलिमा पागलों की तरह बोल रही है!
नीलिमा की माँ सुमित्रा कहती है नही बेटा,सामने कोई नही है,
नही माँ,वो मुझे नही छोड़ेगी,उसने मेरे सचिन को भी मार डाला,अब वो मुझे भी नही छोड़ेगी,ऐसे बोलते बोलते नीलिमा फिर बेहोश हो जाती है!उसके दिमाग में रूहानी का भयानक चेहरा डर बन कर बस चुका है!कुछ दिनों बाद वो हॉस्पिटल से ठीक होकर घर आ जाती है लेकिन वो हर समय डरी और सहमी हुई रहती है!एक दिन उसकी सहेली स्वाति उससे मिलने आती है!नीलिमा उसे देख कर बच्चों की तरह बिलख बिलख कर रोने लगती है और उसके गले लग कर बोलती है स्वाति,उसने मेरे सचिन को मार दिया ,वो मुझे भी नही छोड़ेगी,वो किसीको नही छोड़ेगी!
स्वाति उसे दिलासा देती है,नीलिमा जो हुआ उसे भूल जा,अब सचिन को गए भी दो महीने से ज्यादा का समय हो गया है!तू भी उसकी यादों से बाहर निकल!जो हादसा तेरे साथ हुआ वो जगह यहाँ दिल्ली से बहुत दूर है!यहाँ कोई रूहानी नही आ सकती है!
लेकिन नीलिमा के दिमाग में तो रूहानी का डर बैठ चुका है,वो हर समय डरी और सहमी हुई रहने लगती है!स्वाति भी हर रोज नीलिमा से मिलने आती है!एक दिन उसे रास्ते में सचिन का दोस्त नितिन मिलता है!वो उसे नीलिमा की तबियत के बारे में सब बताती है!नितिन भी स्वाति के साथ नीलिमा को देखने उसके घर आता है!नितिन नीलिमा की हालत देख कर बहुत दुखी होता है!वो शांत मन से नीलिमा से उस रात की सारी बात पूछता है!नीलिमा भी उसे रूहानी के बारे में सब बताती है!ये सब सुनकर नितिन कहता है,नीलिमा मुझे अपने मरे हुए दोस्त की कसम,मैं उस रूहानी से बदला लेकर रहूँगा!चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान ही क्यों ना देनी पड़े!
नितिन की बात सुनकर स्वाति भी कहती है नितिन मैं भी तुम्हारे साथ हूँ!हम दोनों का अब एक ही मकसद है!
नही स्वाति मैं तुम्हारी जान खतरे में नही डाल सकता नितिन कहता है!
शायद तुम नही जानते नितिन कि मेरे पिताजी पुराने शिव मंदिर के बहुत बड़े पुरोहित है!उन्होंने ऐसे कई भूतप्रेतों को मुक्ति दिलवाई है!उनसे कुछ विद्या मैंने भी सीखी है!जो तुम्हारे और मेरे हम दोनों के काम आएगी!फिर हम तो उस चुड़ैल की आत्मा को मुक्ति दिलवा कर एक पुण्य का काम ही करेंगे ना!इसीलिए मैं भी तुम्हारे साथ ही चलूंगी!स्वाति नितिन को समझाती है!नितिन भी उसे साथ चलने के लिए हाँ कर देता है और अपने घर चला जाता है उनसे इजाजत लेंने!
नितिन अपने माँ बाप की इकलौती संतान है!उसके पापा शहर के जाने माने उद्योगपति है,पैसे की कोई कमी नही है!नितिन घर जाता है,माँ को आवाज लगाता है!नितिन की माँ आती है,क्या हुआ बेटा?
माँ मुझे सुबह घुमने जाना है,दोस्तों के साथ!मेरा समान पैक करदो!मैं कुछ दिनों में आऊंगा!नितिन अपनी माँ नताशा से कहता है कि तभी नितिन के पापा राज सिंघानिया वहाँ आ जाते हैं!कहाँ जाने की तैयारी हो रही है हमारे बेटे की?वो पूछते हैं!
पापा मैं अपने दोस्तों के साथ कुछ दिनों के लिए घूमने जा रहा हूँ!नितिन बताता है!
ठीक है जाओ,अपनी नई वाली गाड़ी ले जाना!लेकिन एक बात ध्यान रखना,तुम हमारे इकलौते बेटे हो,हमारी जान बसती है तुममे!अपना पूरा ख्याल रखना!किसी भी चीज की जरूरत हो तो एक फ़ोन कर देना ,मैं आ जाऊँगा!राज अपने बेटे से कहते हैं!
जी पापा,नितिन कहता है!
चलो पहले चल कर खाना खालो!नताशा नितिन और राज से कहती है,फिर तीनों मिलकर डिनर करते हैं!कौन जाने आगे ये तीनों एक साथ कब खाना खाएंगे बैठकर!

दूसरी ओर,घर जाकर स्वाति भी अपने पिताजी को सारी बात बताती है!वो उसे आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं बेटा तुम अच्छे काम से जा रहे हो,ईश्वर तुम्हे जरूर सफलता देंगे!मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है!अगले दिन सुबह ही नितिन स्वाति के घर आता है और उसे लेकर चल पड़ता है रूहानी की ओर!
रास्ते में नितिन और स्वाति बिल्कुल खामोश बैठे हैं कि तभी स्वाति अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहती है मैं तुम्हारे साथ जा रही हूँ सिर्फ अपनी दोस्त की ऐसी हालत का बदला लेने लेकिन तुम इसे कुछ गलत मत समझ लेना!
मैंने तो तुम्हे कुछ नही कहा स्वाति,लगता है तुम्हारे खुद के मन में ही कुछ है!तभी तो ऐसी बाते कर रही हो!नितिन उसे मजाक में छेड़ता है!
जी नही,मेरे मन में कुछ नही है तुम्हारे लिए,मैं सिर्फ तुम्हे चेतावनी देना चाहती हूँ!तुम मुझे अकेली लड़की समझ कर अबला मत समझ लो,इसीलिए कहा मैंने!स्वाति कहती है!
उसकी बात सुनकर नितिन जोर से हँसता है,तुम ओर अबला!तुम्हे देख कर तो वो रूहानी भी डर जाएगी!नितिन स्वाति को कहता है!
उसकी बातें सुनकर स्वाति को गुस्सा आ जाता है इससे पहले कि स्वाति नितिन को कुछ कहती नीतिन गाड़ी की ब्रेक लगा देता है!
स्वाति नितिन से पूछती है क्या हुआ गाड़ी क्यों रोक दी!
नितिन स्वाति से कहता है,वो देखो सामने!
स्वाति सामने देखती है कि ठीक गाड़ी के सामने एक लड़का और एक लड़की खड़े हैं!नितिन और स्वाति गाड़ी से उतर कर उनकी ओर जाते हैं और नितिन उस लड़के को कहता है कि रॉकी यार तू यहाँ कैसे?
वो लड़का उसे बोलता है कि तूने क्या सोचा अपनी गर्लफ्रैंड के साथ अकेला चला जाएगा घूमने?मैं भी आ गया देख अपनी तनु को लेकर!
तभी स्वाति गुस्से में बोलती है एक्सक्यूसेमी,मैं इस नितिन की गर्लफ्रैंड नही हूँ!तभी नितिन स्वाति की बात बीच मे ही काटते हुए बोलता है रॉकी यार,अभी इतने भी बुरे दिन नही आये कि इस चुड़ैल को अपनी गर्लफ्रैंड बनाऊं!
ये बात सुनकर स्वाति भड़क जाती है,बोलती है अगर मैं चुड़ैल हूँ तो तुम भी किसी भूत से कम नही हो!इस तरह दोनों में बहस हो जाती है!तभी रॉकी उन्हें बीच में ही रोक कर वहाँ जाने की वजह पूछता है और नितिन उसे सारी बात बताता है!
अब रॉकी कहता है तो ठीक है ना हम भी चलेंगे तुम्हारे साथ!एक साथ जाएंगे तो वो रूहानी कुछ नही बिगाड़ पाएगी हमारा!ये कहकर वो अपनी गाड़ी की चाबी ड्राइवर को देकर एक ही गाड़ी में निकल जाते हैं रूहानी से सामना करने!
क्या ये चारों रूहानी का सामना कर पाएंगे जानने के लिए देखिए इसका अगला भाग!
हर हर महादेव
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