मात-पिता से जीवन मिलता,
उनके लहू से शरीर है बनता ।
पिता है जीवन का सार ,
माता है ममता का आधार ।
पिता बिना घर में न माया,
पिता बिना न साज ओ श्रृंगार ,
मां भी दिखती है बेजान।
पिता दिखताअति कठोर ,
तरुवर के घने वृक्ष सा होता ।
छाया देता बच्चों को संभालता,
परवरिश में सब कुछ भूल जाता ।
ध्यान रखता सब बच्चों का ,
जरूरतें करता घर भर की पूरी ।
अपना ना वह ध्यान रखता ,
बच्चों को कई जोड़े कपड़े बनाता ,
खुद 2 जोड़ी में काम चलाता ।
पिता है हमारी उम्मीद ,
हमें डांट लगाता ,
अनुशासन का पाठ पढ़ाता ।
मुसीबत कितनी ही हो,
हिम्मत और विश्वास जगाता ।
घर की बगिया का प्यारा माली ,
सबकी उम्मीदों की आस है होता ।
बेटियों को विशेष प्यार है करता ,
उन पर अधिक ममता बरसाता ।
पुत्रों पर अधिकार है रखता ,
कर्मठता का पाठ पढ़ाता।
पिता है घर की उम्मीद ,
जिम्मेदारी का अहसास सिखाता ।
क्या कहूं पिता के बारे में ,
शब्दों में ना कह पाऊंगी।
प्यार उनका आज भी अपने पास पाती हूं ,
स्नेह,आशीर्वाद, दुलार की खान थे पापा।
घर में सब की जान पापा ,
हर परेशानी की एक उम्मीद है पापा ।
मधु अरोड़ा

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