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जीवन बहती नदी की धारा है---
उठ रही लहरें सुख दुख की,
गृहस्थी रूपी फर्ज की--- 
नैया को पार लगाना है,
आते हैं तूफान बहुत से---
नैया डगमग जाती है, 
संयम की पतवार अगर हो---
नैया बच ही जाती है, 
बीच भंवर में आते-आते---
डगमग गोते खाती है,
गर मालिक का साथ सदा हो---
नैया डूब ना पाएगी,
बीच भंवर में आकर भी---
पल भर में बच जाएगी, 
दुख रूपी लहरों का आना--- 
एक अनुभव कराता है, 
सुख की लहरों का सुहाना---
पैगाम लेकर आता,

संगीता वर्मा✍✍