हां मैं गुनहगार हूं , मैंने ही मारा है अपने बेटे को गला घोंट कर । क्योंकि उसने सिर्फ एक बच्ची का बलात्कार नहीं किया था , बल्कि उसने बलात्कार किया था मेरी ममता का, मेरी कोख, मेरी परवरिश का, मेरी आंचल से झड़ते अमृत का, मेरी उस निष्ठा का बलात्कार किया था जिस में डूब कर हर मां ! दिन को दिन नहीं समझती ,रात को रात नहीं समझती, अपने बच्चे की नींद सोती और जागती है । भरी अदालत में अपनी बात कहते कहते पूर्वी फफक कर रो पड़ी ।
आज से पांच साल पहले की घटना है पूर्वी के घर काम करने वाली की बेटी ज्योति को उसके बेटे रोहन ने बहला-फुसलाकर ले जाकर , अपने दोस्तों के साथ मिलकर बड़ी बेरहमी से उसे मसल कर सड़क किनारे फेंक आया था । जब वह मिली थी तब उसकी स्थिति इतनी बुरी थी की देखकर दिल दहल जाए । ज्योति की मां बेटी को न पाकर घबराकर पूर्वी के पास आई थी और फफक कर रो पड़ी थी
"दीदी जी मेरी बेटी को ढूंढ लाइए मेरा दिल बैठा जा रहा है। न जाने कहां होगी रात से घर नहीं लौटी किस हाल में होगी । बस 9 वर्ष की बच्ची है उसे तो ज्यादा कुछ समझ भी नहीं आता। आपको तो पता ही है उम्र भले उसकी 9 वर्ष हो गई है पर उसका दिमाग तो अभी तीन चार वर्ष का ही है । न जाने कहां भटक गई मेरी बच्ची । मेरे तो कुछ समझ नहीं आ रहा अब आप ही कुछ कीजिए दीदी जी "
कहती हुई ज्योति की मां पूर्वी के पैरों पर गिर गई । पूर्वी ज्योति की मां को लेकर थाने गई वहां रिपोर्ट लिखवाई ।
तब तक थाने में खबर आ चुकी थी कि हाइवे के किराने एक लड़की अधमरी अवस्था में पाई गई है । लगता है उसके साथ बलात्कार हुआ है। एक सिपाही दरोगा को सूचना दे गया की लड़की को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है बस अभी उसकी पहचान नहीं हो पाई है । लड़की की उम्र आठ या नौ साल सुनकर ज्योति की मां घबरा गई उसके मन में आशंका हुई कहीं वह हमारी ज्योति तो नहीं उसने पूर्वी को कहा दीदी जी जल्दी से चलिए अस्पताल । पूर्वी अपनी स्कूटी पर पीछे ज्योति की मां को बिठाकर तेजी से सदर अस्पताल की तरफ बढ़ी, उस अध मरी बच्ची को देखकर दोनों के होश उड़ गए । यह बच्ची कोई और नहीं ज्योति ही थी । पूर्वी डॉक्टर से मिली वहां तैनात पुलिस वाले से भी मिली सब को बताया कि यह बच्ची इस महिला की है और मैं इसे जानती हूं । दो दिन के इलाज के बाद ज्योति को होश आया तब उसने सबसे पहले सच्चाई अपनी मां और पूर्वी को बताया सच्चाई सुनकर पूर्वी का दिमाग हिल गया और उसके पैरों तले जमीन खिसक गई । ऐसा लगा मानो उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया हो, वह घबराकर ठिठक कर वह लगी कुर्सी पर धड़ाम से गिर गई । क्या उसका खुद का जना बेटा ऐसा कुकर्म कर सकता है । हजारों सवाल उसके अंदर उमड़ने - घुमडने लगे । वह ज्योति को हिम्मत दे कर कही कि
"आज से तुम मेरी बेटी हो ! तुम्हें कुछ नहीं होगा और न्याय भी मिलेगा । मैं दिलवांगी तुम्हें न्याय ।"
वह सीधा घर पहुंची अपने बेटे को बुलाया और उससे सब बात जानने की कोशिश की पहले तो रोहन ने इनकार किया ! बहुत सख्ती के बाद उसने अपना जुर्म कबूल किया । पर उसे बहुत अफसोस नहीं था अपने किए पर बड़े आराम से वह कह रहा था !
"मां आप क्या नौकरानीयों के चक्कर में लगी रहती हैं यह लोग तो ऐसी ही होती है खुद इधर-उधर मुंह मारती हैं तब तो बुरा नहीं लगता हमने थोड़ा इंजॉय कर लिया तो क्या हुआ कुछ पैसे वैसे देकर मुंह क्यों नहीं बंद करवा देतीं है आप !"
रोहन की बात सुनकर पूर्वी दुगनी शर्म से गड़ गई और गुस्सा उसके सातवें आसमान पर चढ़ गया एक आग सी उसके अंदर धधक उठी उसने गुस्से में बड़ी जोर का तमाचा रोहन के गाल पर जड़ दिया और कहां "औरत मनोरंजन का सामान नहीं होती। चाहे वह किसी भी जाति बिरादरी या किसी भी औकात की हो वह हमेशा सम्माननीय होती है तुम्हारी मां भी औरत है तो क्या तुम अपनी मां के साथ भी ऐसा ही करोगे । "
वह बोलती गई बोलती गई न जाने क्या क्या बोल गई पर जो भी बोल गई कड़वा था पर सच था । पूर्वी ने कहा- "रोहन तुम्हें अपना जुर्म कबूल करना होगा और तुम्हें सजा भुगतनी होगी अपने किए की... अगर तुम सोच रहे हो कि मैं तुम्हारी मदद करूंगी तो यह दिमाग से निकाल दो तुम मेरे बेटे हो या कोई हो तुमने अपराध किया है मेरे लिए सिर्फ अपराधी हो मेरे दिल में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है । "
इतने में रोहन भड़क गया और चिल्ला चिल्ला कर कहने लगा -
"अगर आप यह भूल सकती है कि मैं आपका बेटा हूं तो मैं भी भूल जाऊंगा कि आप मेरी मां है । "
रोहन ने आक्रोश में सच में भूल बैठा कि वह उसकी मां है उसने पूर्वी पर एक पर एक प्रहार करना शुरू किया पूर्वी के बर्दाश्त के बाहर सब होता जा रहा था इसी हाथापाई में कब रोहन का गला पूर्वी के हाथ में आ गया और वह उसे दवा गई उसे भी याद नहीं है । ज्योति की हालत देखकर वह मां नही रह गई थी सिर्फ और सिर्फ एक घायल औरत रणचंडी का रूप लेकर रोहन के सामने खड़ी थी जब पूर्वी के हाथ से रोहन का गला छूटा तब तक वह प्राण त्याग चुका था । चीख चिल्लाहट सुनकर पड़ोस के लोगों ने पूर्वी के पति समीर को फोन कर दिया था समीर भी तब तक आ चुके थे उन्होंने बेहोश रोहन को देखा और विक्षिप्त अवस्था में पूर्वी मिली जल्दी से एंबुलेंस को लाया गया दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया डॉक्टर ने रोहन को देखते ही मृत घोषित कर दिया और पूर्वी का इलाज चलता रहा.... 1 महीने के इलाज के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौटी । उसने समीर को समझाया वह रोहन को मारना नहीं चाहती थी उसे तो उसे तो बस उसके जघन्य अपराध का एहसास दिला कर उसे सजा दिलाना चाहती थी कानूनी तौर पर । पर न जाने कैसे उसके हाथों से उसके बेटे का खून हो गया । उसके स्वस्थ होने की खबर सुनकर ज्योति मां के साथ आई ....वह अस्पताल में भी मां के साथ आती रहती और पूर्वी की बेटी की तरह ही उसकी देखभाल करती , प्यार जताती ...... समीर ने भी उसे बेटी स्वीकार लिया था । ज्योति और उसकी मां की प्रेम सेवा ने जल्दी ही पूर्वी को स्वस्थ कर दिया । और कानूनी तौर पर शुरू हुई ज्योति को इंसाफ दिलाने की मुहिम । 5 वर्ष तक केस चला रोहन के सभी दोस्त एक एक कर पकड़े गए । और सब को सजा मिली अब पूर्वी अपनी सजा का इंतजार कर रही थी। उसने रोहन की हत्या का जुर्म कुबूल किया और कानून से उचित सजा की मांग की ताकि कानून की अपनी मर्यादा और महिमा बनी रहे । और कोई भी उत्तेजना में कानून को हाथ में न ले । अदालत में उपस्थित सब लोगों की पलके भीगी थी एक मां ऐसी भी होती है जो अन्याय के खिलाफ अपने बेटे के सामने भी खड़ी हो जाए, मां को ऐसी ही होना चाहिए जो अपने बच्चों की गलतियों को न छुपाए और न उन्हें बढ़ावा देकर दूसरी जघन्य अपराध को आमंत्रित करें ।
.....इति
...✍️ पिंकी मिश्रा
भागलपुर (बिहार)

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