आना और जाना
तो बस है एक बहाना,
वास्तव में ना तो कोई आता है
और ना कोई जाता,
रह्ता यहीं विद्यमान सदा
सतत,निरंतर,चीरकाल 
किसी ना किसी रूप में,
इसी ब्रह्मांड में,
जैसे सूरज की किरनें
जैसे झरने का बहाव,
जैसे समुद्र की लहरें
जैसे पर्वतों का ठहराव
बनी हुई है इनकी निरंतरता,
कहते हैं जीवन है छन्भंगुर 
और मृत्यू है अटल 
पर वास्तव में 
मृत्यू छन्भंगुर तत्कालिक
क्योंकि इसके बाद
जन्म है निश्चित
यही तो सृष्टि का नियम है।
कालान्तर से यह धरा
देखती आयी, सह्ती आयी
जीवन और मृत्यू का यह चक्र
ना भूत, ना वर्तमान, ना भविश्य
बस चल रहा यह चक्र निरंतर
युगो युगो सदियों से।

                 ,,,,,,,डॉली मिश्रा "पल्लवि'✍️