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सभी खुश थे। 
सभी को अपना- अपना हिस्सा जो मिलने वाला था। 
    दादाजी ने अपने तीनों बेटों मे एक समान हिस्सा बाँट दिया।
   चलों अब तो झगड़े नहीं होगें.... खुद से कहते हुए आगे की ओर जा रहे थें।
    मैं दादाजी के पीछे जाने लगीं....और दादाजी की उँगली पकड़े हुए....दादाजी से कहा की ....मैं भी आपके साथ रहना चाहती हूँ मुझे भी अपने साथ ले चलिए।

    तभी पापा पीछे से आवाज देते हुए कहते है....अरें बेटा अपना हिस्सा तो इधर है न।
       नही पापा घर का सबसे बड़ा हिस्सा तो किराये के मकान में रहने जा रहा है।

तीनों भाईयों के सिर नीचें की ओर झूके गए।
                 
       कुमारी आरती सुधाकर सिरसाट
        बुरहानपुर मध्यप्रदेश