दिल मोहब्बत में  वफा हो जाए,
जो अभी तक न हुआ हो जाए।।

तुझ में ये ऐब है कि खूबी है,
जो तुझे देख ले तेरा हो जाए।।

तेरी बातों में  अदा है हट कर,
एक घायल भी जवां हो जाए।।

तेरा लिबाज़ देख कर मेरे,
 दिल को पागल सा गुमां हो जाए।।

तेरे अब्सार की गहराई को जो भी देखे,
उसको तेरा ही पता हो जाए।।

 जिस्म को तेरे अगर छू लूं तो,
तुझमें गुलशन का शमां हो जाए।।

बस ये ख्वाइश है कि प्रीत की दिल से।
खुदा कुबूल ए दुआ हो जाए।।
हरप्रीत कौर
शाहदरा, दिल्ली