मन बड़ा चंचल है,
मन को रखें नियंत्रण,
वरना पीछे बहुत पच्छताना पड़ेगा,
लेके जब जमी पर गिर जाएगा।
मन का तुम न सुनो,
सुनाओ तुम मन को,
चाहे तुम जितना रंग बदलो,
पर रहना होगा एकहि रंग में।
तेरा न यहां एक चलेगा,
चलेगी सिर्फ मेरी!
जो कहता हूं सो सुन,
क्यों रूप बदलता अनेक है।
अरे मन!तू एकहि रूप में रहके,
हरि का गुणगान कर,
तेरा मेरा कल्याण होगा,
हरि के गुणगान से।
(अरुण कुमार)

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