ये सच है कि अपने कर्मों का ही फल पाता इंसान है,
लेकिन दिव्य आचरण होती व्यक्ति की सच्ची पहिचान है।

दुनियां झूठी दौलत झूठी झूठे सारे रिस्ते है,
जिनके होते दिव्य आचरण नरश्रेष्ठ वही कहलाते है।

आचरणों से ही झलकती है मानसिकता इंसानों की,
शरीर से नही आचरणों से ही शोभा है हम इंसानों की।।

हीन आचरणों ने रावण का अस्तित्व मिटा दिया,
दिव्य आचरणों ने श्रीराम को भगवान बना दिया।

व्यक्ति की पहली पाठशाला घर और पहली गुरु माँ होती है,
जो नित्य ही अपनी संतान को उचित संस्कार और अच्छे आचरणों की शिक्षा देती है।

दिव्य आचरण से ही व्यक्ति का श्रंगार  और शोभा है जीवन की,
बना लेते है  हम परायों को भी अपना यही महिमा है आचरण की।
शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश