कभी चाहत की नजर से तुमने देखा होगा मुझको 
कभी देखकर भी तुमने नज़र चुराया होगा 
कभी खिड़की की आड़ मे बैठी होगी तुम 
कभी तो ठंडी हवा का झोंका तुम पर भी आया होगा

कभी नजर तुम्हारी भी पड़ी होगी चौखट पर  
कभी तुमने भी मेरा गीत गुनगुनाया होगा 
कभी खो गयी होगी तुम मेरी यादों मे 
कभी तुम्हे भी वो पुराना दिन याद आया होगा

कभी खो गयी होगी तुम मेरे सपनो मे 
कभी मैंने भी तुम्हारी नींद को चुराया होगा 
कभी तड़प कर तुम उठ गयी होगी मेरी याद  मे 
कभी तुम्हे भी शिद्दत से रोना आया होगा

कभी बर्दाश्त किया होगा तुमने भी धूप को 
कभी रिमझिम बारिश मे तुमने भी नहाया होगा 
कभी देखकर सुहाने मौसम को 
तुम्हारा भी रोम रोम मुस्कुराया होगा

कभी मिलन की आस जगी होगी दिल मे 
कभी मुझे खोने का डर भी तुम्हे  सताया होगा 
कभी मचल गयी होगी तुम्हारी भी आरजू 
जब मेरे मिलन का दिन नजदीक आया होगा

कभी चाहत की नजर से तुमने देखा होगा मुझको 
कभी देखकर भी तुमने नज़र चुराया होगा 
कभी खिड़की की आड़ मे बैठी होगी तुम 
कभी तो ठंडी हवा का झोंका तुम पर भी आया होगा
आपका मुकेश "लखनवी"