देख नही सकती थी पर मन की आंखो से सबकुछ देख लेती थी!
पढना नही आता था पर मेरे मन की हर बात वो पढ लेती थी!
ये मेरी मां ही थी जो अंधेरो मे भी मुझे ढूंढ लेती थी!
दिल की आवाज को सांसो से महसूस करना उसे आता था,
मुश्किल हालातो से सामना कैसे करना है समझाना उसे आता था!
शब्दो की गर्माहट, दिल की घबराहट, वो सबकुछ समझ लेती थी,
अपनी खुशियो को मुझ पर न्योछावर कर, दुनिया की नजरो से बचा,आंचल मे अपने मुझे छुपा लेती थी,
ये मेरी मां ही थी जो अंधेरो मे भी मुझे ढूंढ लेती थी!
श्वेता अरोड़ा

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