प्रेम को परखा नहीं
प्रेम को तो समझा जाता है
ये वो साथ भी हो सकता है जहां
हम सिर्फ सारे गम भुला कर
दो पल साथ तुम्हारे हंस सके
प्रेम वो डोर है जो दिमाग से
बांधी नहीं जाती
वहां तो हृदय को पढ़ा जाता है
प्रेम ईश्वर है,
प्रेम ज्ञान है,
प्रेम अनुभूति है,
प्रेम सत्य है ,
प्रेम पवित्र है,
प्रेम सदमार्ग भी है,
प्रेम अमिट है,
और प्रेम ही जीवन है।।
प्रिया ❤️✍️

0 टिप्पणियाँ