पिछले भाग में आपने पढ़ा कि वो प्रेत माही के कमरे में आता है अब आगे-
माही प्रेत से कहती है कि मैं जो कहूँगी वो करोगे मेरे लिए?
बोलो अप्सरा तुम्हे क्या चाहिए?प्रेत माही से पूछता है!
मेरा पीछा छोड़ दो,मुझे तुमसे बिल्कुल भी प्यार नही है,मानोगे मेरी ये बात?
प्रेत माही को बहुत प्यार से देखकर मुस्कुराता है!फिर कहता है पूरी कायनात मुझसे कहोगी तो वो भी तुम्हारे कदमो में रख दूँगा लेकिन बस यही नही कर सकता मैं!तुम मेरा जुनून बन चुकी हो!ये कहकर वो माही के करीब आता है वो दूर जाने की कोशिश करती है लेकिन प्रेत उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लेता है!प्रेत एक पल के लिए उसकी आँखों पर अपना हाथ रखकर उसकी आँखे बंद कर देता है!माही एक ही पल में उसका हाथ हटाकर अपनी आँखे खोलती है तो देखती है कि वो एक अलग ही दुनिया में है!माही की आँखे फटी की फटी ही रह जाती है!वो अपने चारों ओर देखती है कि वो एक अलग ही दुनिया मे है!इतना खूबसूरत नजारा उसने पहली बार देखा था आज,मानो जैसे वो कहीं स्वर्ग में हो!फिर वो खुद अपने आपको देखती है तो देखती रह जाती है!वो खुद किसी परी से कम नही लग रही थी!गुलाबी रँग के कपड़े पहने,चारों तरफ फूल ही फूल और तभी उसने महसूस किया कि उसके पँख भी निकल आये हैं!ये सब देख कर वो मदहोश हो जाती है!

माही अपने मे ही खोई इधरउधर घूम रही है कि तभी वो प्रेत उसपर फूलों की बारिश करता है!माही उनकी खुशबू से सुधबुध खोने लगती है!तभी वो प्रेत माही को अचानक अपनी बाहों में भर लेता है!माही भी खुद को उससे अलग नही कर पा रही है,वो अपनी आँखों को बंद किये एक अलग ही दुनिया मे पहुँच चुकी है!एक बार भी माही का ध्यान उसके भयानक चेहरे की तरफ नही जाता है!माही ये भी भूल चुकी है कि वो उस प्रेत से नही बल्कि नील से प्यार करती है!माही अब खुद को सारी मर्यादाओं से आजाद कर उसकी बाहों में सिमट चुकी थी!माही खुद को पूरी तरह से प्रेत को सौंप देती है!आज एक लड़की और एक प्रेत का ऐसा मिलन हुआ जिसे कायनात भी देख कर हैरान हो रही थी!सबसे अलग था एक इंसान और एक हैवान का मिलन!अचानक से माही अपनी अपनी सपनों की दुनिया से निकल कर हकीकत की दुनिया में आती है!

वो देखती है कि वो अपने कमरे में,अपने बिस्तर पे लेटी हुई है!रात के दो बजे हैं वो अचानक से देखती है कि वो प्रेत की बाहों में है!उसे एक एक करके सारी बातें याद आती है वो चिल्ला कर उठती है और खुद को प्रेत से अलग करती है!अब माही जोर जोर से रोना शुरू कर देती है,वो प्रेत उसे कहता है क्यों रो रही हो तुम?अब तो तुम मेरे प्यार को अपना चुकी हो!
माही उसे गुस्से में दूसरी तरफ धक्का देती है और कहती है कि इसे तुम प्यार कहते हो?अपने जादू से मुझे अपने वश में करके,मेरी मदहोशी का फायदा उठा लेना,क्या यही प्यार है तुम्हारा?अगर तुममे हिम्मत होती तो मुझे तब छूते जब मैं होश में होती!तुमने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके मेरे जिस्म को तो पा लिया लेकिन मेरी आत्मा को कैसे पाओगे?
तुम भी मेरी,ये जिस्म भी मेरा,ये आत्मा भी मेरी,ये मैं साबित करके रहूँगा!प्रेत माही की आँखों में आँखे डालकर बोलता है!
नही,ऐसा नही हो सकता है!ये कहकर माही गुस्से में रोती हुई अपने कमरे से सीधे अपने माँबाप के कमरे में चली जाती है!वो गुस्से में जोर-जोर से दरवाजे पे खड़ी अपनी माँ को आवाज दे रही है!उसकी माँ माही की आवाज सुनकर कमरे से बाहर आती है और उसे कमरे में ले जाकर आराम से बैठने को कहती है!माही अपनी माँ से लिपट कर जोर-जोर से रोने लगती है!उसकी आवाज से उसके पिता भी जाग जाते हैं!माही की माँ उससे कहती है क्या बात है माही मुझे सब सच-सच बताओ!माही अपनी माँ को शुरू से लेकर अब तक कि एक एक घटना बता देती है और वो नील के बारे में भी सब बता देती है!माही कहती है कि माँ मैं नील से बहुत प्यार करने लगी हूँ और मैंने उसे हमेशा उसके साथ रहने का वादा किया था!लेकिन मुझे नही पता था कि ये सब हो जाएगा,आज मैं नील को क्या जवाब दूँगी?उसे तो यही लगेगा कि मैंने उसे धोखा दिया है!ये कहकर माही जोर-जोर से रोने लगती है!माही की माँ उसे चुप करती है जैसे किसी छोटे बच्चे को उसकी माँ चुप कराती हो!
अब जब माही थोड़ा चुप होती है तो उसकी माँ कहती है बेटा मुझे कई दिनों से लग रहा था कि जैसे तुम हमसे कुछ छुपा रही हो,काश कि तुम मुझे ये सारी बात पहले ही बता देती तो बात यहाँ तक ना पहुँचती!लेकिन अब तू इस बारे में नील को या किसी को भी नही बताओगी,मुझसे वादा करो!मैं कल सुबह ही अपने कुलगुरु से बात करती हूँ!वो जरूर कोई उपाय बताएंगे!अब मुझे ये बताओ ये नील कौन है?तुमने कभी बताया क्यों नही हमे इस बारे में?
माही जवाब देती है,माँ नील को मैं ज्यादा समय से नही जानती हूँ,लेकिन मैं और नील एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे हैं!
ठीक है,तुम किसी दिन नील को घर बुलाओ,फिर तेरे पापा और मैं ये फैसला करेंगे कि वो तुम्हारे लिए ठीक है या नही!जब तक तुम्हे मेरी कसम है कि तुम नील को कुछ नही बताओगी!माही की माँ कहती है!
ठीक है माँ,जैसा आप कहें!माही जवाब देती है और वहीं अपनी माँ की गोद मे सिर रखकर लेट जाती है!माही सोचते-सोचते वहीं सो जाती है!
सुबह हो जाती है और माही को उसकी माँ तैयार होने को कहती है!वो कहती है,माही बेटा,जल्दी से नहा कर तैयार हो जाओ,हमें गुरुजी के आश्रम जाना है!माही भी उठ कर अपने कमरे में चली जाती है!वहाँ जाते ही उसे रात की सारी घटना याद आने लगती है!वो अपने चारों ओर कमरे में देखती है कि कहीं वो प्रेत उसके आसपास तो नही है!उसे हर पल यही महसूस हो रहा है कि जैसे वो प्रेत उसे ही देख रहा हो!वो जैसे ही अपने बाथरूम में नहाने जाती है तो उसे लगता है कि जैसे वो प्रेत उसे घूर रहा हो,वो डरके बाहर आ जाती है!माही अपने कपड़े लेकर सीधे अपने माँबाप के कमरे में चली जाती है और उन्ही के बाथरूम में नहाकर तैयार हो जाती है!जब माँ कमरे में आती है तो उससे यहाँ तैयार होने की वजह पूछती है!माही उसे बताती है कि माँ मुझे अपने कमरे में हर समय वो प्रेत महसूस होता है!मुझे ऐसा लगता है कि जैसे उसने मेरे कमरे को ही अपना घर बना रखा हो!माँ शायद आपको मेरी बात पर यकीन ना हो लेकिन ये सच है कि मैं उसके अपने आसपास होने का हर एहसास महसूस कर सकती हूँ!वो एहसास मुझे आपके कमरे में कभी नही होता माँ!ना चाहते हुए भी उस प्रेत से मेरा एक रिश्ता जुड़ गया है माँ!
बस करो माही,खबरदार जो उस प्रेत से कोई रिश्ता बनाया!मैं अपने रहते उसे तुम्हारे करीब कभी नही आने दूँगी!माही की माँ गुस्से में बोलती है कि तभी वहाँ माही के पापा आ जाते हैं!वो माही को प्यार से तसल्ली देते हैं और कहते हैं बेटा,तू चिंता ना कर,गुरुजी कोई ना कोई उपाय जरूर बताएंगे!ये कहकर वो तीनों आश्रम के लिए निकल जाते है!
अब वो तीनों कुछ ही घण्टों में अपने कुलगुरु के आश्रम में पहुँच जाते हैं!वहाँ माही अपने साथ हुई हर घटना गुरुजी को बताती है!गुरुजी जब उस प्रेत की शक्तियों का जानते हैं तो वो उस जगह के बारे में पूछते हैं जहाँ से ये प्रेत माही के पीछे लगा था!
माही भी गुरुजी को वो जगह और उस पेड़ के बारे में बताती है जिसे सुनते ही गुरुजी हैरान हो जाते हैं!वो अब बताते हैं,माही बेटा तुम सब जिस जंगल मे गए थे वो जंगल उसी प्रेत का ठिकाना है और वो पेड़ जहाँ तुम बैठी थी उसी प्रेत का घर!तुम सबने वहाँ जाकर बहुत बड़ी गलती की!मैं उस जगह के बारे में अच्छी तरह से जानता हूँ!वो प्रेत कोई साधारण प्रेत नही बल्कि बहुत ज्यादा शक्तिशाली प्रेत है,उसकी शक्तियाँ भी अपार है!उसका सामना करना बहुत मुश्किल है!उस जंगल में जो भी जाता है वो जिंदा नही लौटता है,फिर पता नही क्यों,उसने तुम सबको जिंदा छोड़ दिया!
माही की माँ कहती है,कुछ उपाय बताइये गुरुजी!नही तो वो मेरी बेटी को अपने साथ ही ले जाएगा!
ठीक है,तुम ये माला लेकर माही के गले में पहना दो और घर चले जाओ!जबतक ये माला माही के गले में रहेगी वो प्रेत माही को छू भी नही पायेगा!लेकिन याद रखना,वो इतना शक्तिशाली है कि उसके लिए माही से ये माला उतरवाना कोई बड़ी बात नही है!इसीलिए चाहे कुछ भी हो जाए माही बेटा,लेकिन तुम ये माला मत उतारना!जबतक मैं अपनी शक्तियों से उस प्रेत के बारे में ज्यादा जानकारी पता लगाता हूँ!मुझे ये भी जानना है कि आखिर उसने माही को ही क्यों पसंद किया!सब कुछ पता करके मैं खुद आऊँगा तुम्हारे घर,उस प्रेत से माही बेटी को छुटकारा दिलवाने!जबतक तुम माही का ख्याल रखना!
माही को गुरुजी एक अभिमंत्रित माला पहनाते हैं और वो तीनों अब गुरुजी से आशीर्वाद लेकर घर आ जाते हैं!
क्या माही के माता पिता उसे प्रेत से छुड़वा पाएंगे ये जानने के लिए देखिए अगला भाग!
हर हर महादेव
🙏🙏🙏🙏🙏

0 टिप्पणियाँ