एक कृति मानव की 
एक कृति प्रकृति की  
एक मे रंग भरे संस्कारों के 
एक मे रंग है प्राकृतिक 

सुंदर सब है 
सुंदरता देखते
 सब अपने दृष्टि कोण  से 
एक है स्वत: ही सुंदर।

मानव अपनी कृति के 
नष्ट होने पर शोक मनाता

और ईश्वर की कृति को 
मानव  स्वयं ही मिटाता।

नादान नहीं समझ पाता 
जब रहेगी प्रकृति की कृति 
तभी बनेगी मानव कृति 
सुन्दर और सुंदर 
अंजु अतुल