कैसे लिखें हम दर्द-ए-ग़म को उसके
सागर को स्याही बनाएंगे ,
तो सागर भी कम पड़ जाएंगे ।
कैसे लिखें हम दर्द-ए-ग़म को ,
जो दरख़्त को कलम बनाएंगे ,
तो दरख़्त भी कम पड़ जाएंगे ।
कैसे लिखें इस मन के उसासों,
और वेदना ओं को ,
उन दर्द से भीगे जज्बों को,
शब्द भी कम पड़ जाएंगे।
  जीना नाम है जिंदगी का ,
जाने वाले के साथ कोई नहीं जाता है,
पर यह भी सच है एक जिंदगी का ,
उसके जाने के बाद ,
पीछे बस एक ठहरा ठहरा सा,
कारवांरह जाता है कारवां रह जाता है।
आँसू लेकर आँखों मे,
सारी उम्र तो जी न पाएंगे,
पर यह भी सच है,
उस तरह कभी मुस्कुरा
न पाएंगे।
सबके साथ में होंगे,
तो दिल के कोने में,
हूंक  उठेगी,
जब होंगे तन्हां तो,
रोएंगे चिलाएंगे।
कहने को वो कुछभी,
कहें, 
पर सच तो है यही,
आखिरी सासों के,
वक्त भी वो याद आएंगे।

अंजु दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।