करती नहीं नुमाइशें मैं अपने दिल के दर्द की ।
मैं मुस्करा के इन्हें नजर अंदाज करती हूँ।।

क्योंकि जब लड़ना है खुद ही खुद से ।
हार और जीत में, मैं फर्क नही आज करती हूं।।

हर हार जीत मेरे लिए सीख सिखाती है।
हर शह के लिए जिंदगी का साज करती हूँ।।

बे बात रूठने की है आदत नहीं मेरी।
पर बेरुखी नही नजर अंदाज करती हूँ।।

बन कर मैं आईना में सही बात ही कहूं।
खुल कर मैं हवाले तुम्हारे राज करती हूँ।।"
                           अम्बिका झा ✍️