प्रकृति से हमें बहुत सारी बातें सीखने को मिलती है।प्रकृति हमारी मां स्वरूप है जो अपने बच्चे को अच्छे सेअच्छी शिक्षा(सीख)देती है। प्रकृति हमसे प्रेम ही चाहती है,जो हम उनकी सुरक्षा व देखभाल करके ही दे सकते हैं।
एक मां होने के नाते प्रकृति,हमसे नाराज भी होती है,जब हम प्रकृति का ध्यान नहीं रखते शायद तभी प्राकृतिक आपदाओं का हमें सामना करना पड़ता है।
कोरोना भी इसका ज्वलंत उदाहरण है जिसे हम वर्तमान में भुगत रहे हैं।हालांकि (वायरस)कोरोना चाइना की देन है।परंतु इसके माध्यम से प्रकृति ने हमें एक सीख दी है।साल 2020 में जब हम लॉकडाउन के दौरान अपने ही घरों में कैद थे, और चाहकर भी घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे थे,जैसे पिंजरे में रहने वाला पक्षी बाहर की दुनिया देखने के लिए तरसता है।
इंसान आधुनिकता की दुनिया में इतना खो जाता है कि प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करता है और अधिक से अधिक पेड़-पौधों को काटता है।ये पेड़-पौधे जब काटे जाते हैं,तो हम किसी के घरों को उजाड़ रहे होते हैं।क्योंकि यह पेड़ पौधे कितने जीव-जंतु,पक्षियों का बसेरा होता है।
🌿प्रकृति की सीख 🌿
नदियां- नदियों से हमें लगातार जीवन में बढ़ते रहने की सीख मिलती है,चाहे चट्टाने रूपी कितने भी मुश्किलें आए ,वह हमें अनवरत बढ़ते रहने की सीख देती हैं।प्राचीन काल से ही नदियां हमारी पूज्यनीय हैं।
समुंदर- जैसा विशाल रूप समुद्र का होता है, वैसा ही विशाल (बड़ा)हृदय रखता है।समुद्र में पिता की गंभीरता भी होती है,और एक माता जैसे बड़ा हृदय भी
होता है।समुद्र से हमें यही सीख मिलती है जैसा मेरा बाह्य स्वरूप है,वैसा मैं भीतर का स्वरूप भी रखता हूं।अर्थात मैं अंदर और बाहर दोनों में एक जैसा हूं।
पर्वत - यह विशाल पर्वत मालाएं जीवन की यही सीख देते हैं, कि कितने भी मुश्किलें आए,सत्य के रास्ते से भटकना नहीं।वृहत पर्वत की तरह अडिग रहना और सत्य के मार्ग में सदा डटे रहना।
धरती व आकाश - ऊंचा आकाश हमे सिखाता है, ऊंचे सपने रखो,उच्च महत्वाकांक्षी बनो।और धरती हमसे कहती है,कितने भी ऊंचे बन जाओ(प्रतिष्ठा प्राप्त करना) पर मुझसे (धरातल) से सदा जुड़े रहना।
पेड़-पौधे - प्रकृति का सबसे बहुमूल्य अंश है।पेड़-पौधे,जो इंसान को सीख देते हैं कि सदा निस्वार्थ कर्म करो।पेड़ पौधे हमें बहुत सारी चीजे,फल,फूल अनाज व दैनिक जीवन से जुड़ी वस्तुएं प्रदान करते हैं,जो निस्वार्थ होता है।ये पेड़-पौधे हमसे प्यार भरी देखभाल ही चाहते हैं।"प्रकृति हमे एक बहूमूल्य सीख देती हैं।"
(प्रकृति के कई रूप होते हैं जिसमें से कुछ ही अंशो का मैंने वर्णन किया है।)
मनीषा भुआर्य ठाकुर (कर्नाटक)

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