दर्द भी क्या चीज है जो,आखों से बह जाता है,
अश्क का गोला बनकर निकल जाता है,
जब सब्र का बांध भी छलक जाता है,
तब दिल का तूफान भी लफ्जो मे उतर जाता हैं ।
खफा हो कर मुह फेर लिया जाता हैं 
तब एक हसीं किरदार नजर आता हैं,
लगता हैं रात भर तुमसे भी सोया नहीं जाता,
आखों में भी खौफ़ नजर आता है।
ठान लिया था हमनें भी,
 न बोलेगे इस बार,
पर ये कम्बखत दिल ही,
मेरे प्यार की दुहाई देते नजर आता है।
दर्द भी क्या चीज है जो,आखों से बह जाता है।