निराकार हैं साकार हैं ......
कौन हैं वो ?

प्रकृति में हैं आकृति में हैं....
हवाओं में हैं फिजाओं में हैं....
फूलों की सुगंध में हैं ......
झरनों की तरंग में हैं ......
कौन हैं वो ?

सागर की लहरों में हैं ......
वर्षा की फुहारों में हैं ......
नीले आकाश में हैं ........
सूर्य के प्रकाश में हैं.......
कौन हैं वो ?


फूलों में सावन के झूलों में हैं ......
पहाड़ों में बागानों में हैं.......
चिड़ियों के शोर में हैं ........
सुनहरी भोर में हैं........
कौन हैं वो ?

बादल के गर्जन में हैं .......
सृष्टि के सर्जन में हैं .......
 चाँद की चाँदनी में हैं .......
अंधेरो में रौशनी में हैं ........
कौन हैं वो ?

जन्म में मृत्यु में हैं .........
प्राणों में श्मसानों में हैं .......
अनदेखा हैं अनजाना हैं .......
आत्मा हैं परमात्मा हैं .......
कौन हैं वो ? 

निराकार हैं साकार हैं .......
ओंकार हैं ओंकार हैं ........

          ..........@ नेहा धामा " विजेता "