हे मन कलम की जय बोल
अपने ज्ञान के दरवाजे खोल
इसकी ताकत अपरम्पार
इसकी बहुत तेज है धार
पल भर मे है मान बढ़ाती
खोल देती है सबके पोल
हे मन कलम की जय बोल
कौन बड़ा है कौन है छोटा
कौन पहना है झूठ का मुखौटा
कौन निभाता है अपना वादा
सबके देती आंखे खोल
हे मन कलम की जय बोल
किसका है ईमान यहाँ जिन्दा
कौन बनाता बातों का पुलिंदा
किसके दिल मे जहर भरा है
कौन रहा है मिश्री घोल
हे मन कलम की जय बोल
राजनीति की नीति बताती
पल भर मे सरकार गिराती
कभी गिराती कभी उठाती
कभी बजाती बेपेंदे का ढ़ोल
हे मन कलम की जय बोल
कभी समर्पण कभी अर्पण
कभी दिखलाती दुनिया को दर्पण
इसकी महिमा क्या मै बतलाऊँ
जीवन मे इसका बहुत है रोल
हे मन कलम की जय बोल
लोगों को ये महान बनाता
लोगों को ये इंसान बनाता
फर्श से अर्श का सफर कराता
बड़ा अमूल्य है इसका मोल
हे मन कलम की जय बोल
आपका मुकेश "लखनवी"

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