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जी लीजिए ~
कि जब तक सांसें साथहैं।
ओज है••••
धड़कनों में स्पंदन और
शिराओं में प्रवाह है।
मत धकेलिए अपने को•••
करूण स्थिति में;
जहां सिर्फ दूसरों की आस है।
तम बन जो ह्रदय को जकङा है।
धुंध की मानिंद गहरा है~
इसे मिटा
नभ पटल पर अंशुमाली
सा दमकिए।
कि तम बहुत प्रगाढ़ है।
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जब तक बाजुओं में
जोर है••••
जी लीजिए कि
विवशता चहुंओर है।
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मत धकेलिए अपने को•••
जहां सिर्फ दूसरों की आस है।
वह दूर जो सविता उदित है;
किस हेतु अपना प्रकाश फैला रही•••
स्वंय को नित जला रही ~
धुंध हटा
दमक रही।
जीवन के अणु को प्रकंपित कर रही।
इसका सम्मान तो कीजिए।
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जीवन है वरदान
जी लीजिए ~
की जीवन की अनदेखी
स्वंय ईश का तिरस्कार है।
अपनी बिगङी बना लीजिए
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कि जब तक सांसें में ओज है
संवर जाइए और संवार दीजिए।
✍ डॉ पल्लवी कुमारी"पाम "

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