महकता है उपवन खिलती है कलियां,
मधुकन के कुंजों में राधा संग सखियां।
बागों में मोर पपीहा डोले,
अमुआ की डाली कोयल बोले,
घनघोर घटा छाई है बरसे बदरिया।

चुन-चुन कर पुष्प जहां राधा श्रृंगार करे,
मधुवन के कुंजों में कृष्ण संग विहार करे,
हाथों में चूड़ी और बाजे पायलिया।

कदम के झूले की शोभा है न्यारी,
राधा संग झूलत है बाकेँ विहारी,
गीत गाती सावन के झूमें सारी सखियां।

मस्त मगन भंवरा भी गीत गुनगुनाता,
कृष्णा का प्यार वो  राधा मन भाता,
प्यार भरी झांकी देखे सारी दुनियां।
महका है उपवन खिलती है कलियां।।

शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश